मथुरा का एक ग्वाला.......

 


आँखो में जिसके ज्वाला है

बोली में मधुशाला है


गोपियों का खाब वो

मथुरा का एक ग्वाला है


रंग जिसका रात है

स्वाभाविक अनुराग है


प्रेम का वो चिन्ह जिसकी

अनोखी हर बात है


अमृत का जो प्याला है

वो मथुरा का एक ग्वाला है


शांत मन का भाव है

प्यार ही स्वभाव है


उभरना ना चाहो तुम

दिल का ऐसा घाव है


मधुरता की वाणी है

जैसे जमुना का पानी है


सबसे बड़ा ज्ञानी है

राधा जिसकी रानी है


सबका रखवाला है

वो मथुरा का एक ग्वाला है


एक हाथ शंख है

माथे पर मोर पंख है


शक्तिशाली सबसे वो

के शक्ति की तरंग है


मामा जिसका कंस है

उस कंस का वो अंत है


माँ यशोदा को तृष्णा है वो

नाम जिसका कृष्णा है


नंद का वो लाला है

वो तो मथुरा का एक ग्वाला है ।



अप्रतिम और अप्रकाशित                                                                   By PRASHANT GURJAR



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