चलो सो जाते हैं ।



चलो सो जाते हैं
तुम हो जाना किसी ओर के 
ओर हम तुम्हारे हो जाते हैं
चलो सो जाते हैं

किनारा भी नज़दीक नहीं
मुड़ने की कोई रीत नहीं

वक्त की लहरे ख़िलाफ़ हैं
तो इन लहरों के संग हो जाते हैं

चलो सो जाते हैं

ख़ुदा भी नाराज़ हैं
दिल में छुपे कई राज़ हैं

किसी दुःखद गाने के साज़ हैं
ये चीख है या आवाज़ हैं ?

चलो कान बंद करके
खामोशी में कहीं खो जाते हैं

चलो सो जाते हैं

हक़ीक़त से क्यूँ भागें हम
इस डर से क्यूँ अब जागें हम

मौत तो एक दिन आनी है
जान भी चली जानी है 

कई क़िस्से ओर एक कहानी है
हँसकर हमें निभानी हैं

दौलत की जगह चलो प्यार के बीज बो जाते हैं
चलो सो जाते है
चलो सो जाते हैं । 

अप्रतिम और अप्रकाशित                                                                   By PRASHANT GURJAR



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