तेरे फ़ासलों के फ़ैसलों से ख़फ़ा हूँ मैं



तेरे फ़ासलों के फ़ैसलों से ख़फ़ा हूँ मैं



तेरे फ़ासलों के फ़ैसलों से ख़फ़ा हूँ मैं
मोहब्बत मैं तुझे हुआ नफ़ा हूँ मैं

अब चाहे पछता तू सनम
पर अब तो तेरी ज़िंदगी से दफ़ा हूँ मैं

तू छोड़ कर मुझको रह कहाँ पाएगी
मुझसे दूर होकर भी तू मेरे नज़दीक आएगी 

मुझे चाहकर अब तू ना जाने कैसे किसी 
और को चाहेगी

ख़त्म हूँ तेरे लिए पर तेरे अंदर 
हरदफा हूँ मैं 

तेरे फ़ासलों के फ़ैसलों से ख़फ़ा हूँ मैं

बेशक तुझे अब मेरी ज़रूरत नहीं
ओर मैं भी अब तेरे कुर्बत नहीं

तुझे जाना है पता था मुझे 
इस बात पर अब मुझे कोई हैरत नहीं

तेरे साथ था जब तब गंदा था मैं
पर अब एक दम सफ़ा हूँ मैं

तेरे फ़ासलों के फ़ैसलों से ख़फ़ा हूँ मैं

तू लेले सब कुछ जो तेरा है
ये रूह तो थी तेरी
ये जिस्म भी लेजा जो सिर्फ़ कहने को मेरा है

वो वादे वो कसमें भी लेती जाना
पर आख़री बार मुझे बस इतना बताना

क्या नया प्यार भी मुझ जितना गहरा है

जा तुझे माफ़ किया 
जा तुझे माफ़ किया

दुनिया के सामने क़बूल करता हूँ कि बेवफ़ा हूँ मैं
पर मेरे हमदम मेरे दोस्त
तेरे फ़सलों के फ़ैसलों से ज़िंदगी भर ख़फ़ा हूँ मैं..



अप्रतिम और अप्रकाशित                                                                   By PRASHANT GURJAR



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