Thursday, 1 August 2019

छुट्टी वाला प्यार..।


छुट्टी वाला प्यार हूँ मैं

छुट्टी वाला प्यार हूँ मैं
 गर्मियों में भी आती है 
और सर्दियों में भी आती है 

जो जाते वक़्त ख़ूब रुलाती है 
मेरी मोहब्बत सिर्फ़ छुट्टियों  में आती है

शाम होते ही मुझे टेलिफ़ोन मिलाती है 
मेरी मोहब्बत सिर्फ़ छुट्टियों में आती है 

उसके लिए होली और दिवाली  के 
बीच का त्योंहार हूँ  मैं 

किसी  का छुट्टी वाला प्यार हूँ मैं 

वो मेरी बातों का जवाब बड़ी ख़ूबसूरती से देती है 
मेरे पास आकर भी वो  मुझसे दूर रहती है 

गर्मियों की शामों में तय होता है 
उसका अपने परिवार के साथ टहलना

और  उसकी गली की ख़ुशबू से मेरे दिल का बहलना

हर मुलाक़ात पर वो अपने शहर के कई 
क़िस्से सुनाती है 

अपने सारे दोस्तों के बारे में बताती है 

मुझे लगता है उसके शहर में भी उसकी 
एक मोहब्बत होगी 

पर ख़ुश रहता हूँ मैं की वो कम से कम 
छुट्टियों में तो मेरे बारे में सोचती होगी 

ये सब जानकर भी उससे शादी करने के 
लिए तैयार हूँ मैं

नादानी में याद ना रहा मुझे की
उसका छुट्टी वाला प्यार हूँ मैं

जाने कहाँ खो जाते हैं वो दिन 
पता ही नहीं चलता 

और उसके अपने घर लौटने का वक़्त आ जाता है 
उसके जाने के ग़म को दबाने में एक अरसा बीत  जाता है

और  फिर से सर्दियों में मेरा छुट्टी वाला प्यार आ जाता है

हर हफ़्ते तो नहीं  पर साल में सिर्फ़ दो बार आने वाला
उसका इतवार हूँ मैं

किसी का छुट्टी वाला प्यार हूँ मैं..।


अप्रतिम और अप्रकाशित                                                                   By PRASHANT GURJAR



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