Saturday, 29 June 2019

क्या लाज़मी है तेरा रूठ कर जाना ..?


“लाज़मी है तेरा रूठ कर जाना”


लाज़मी है तेरा रूठ कर जाना
मेरे सारे सचों को तेरा झूँठ कर जाना

तेरे बे-वफ़ा होने पर भी
मेरा तुझको टूट कर चाहना

फिर भी मोहब्बत में लाज़मी है तेरा
रूठ कर जाना..

कुछ तू मुझे सुनती नहीं है
और
कुछ मेरा कहना ठीक नहीं है

मोहब्बत सबसे ज़रूरी है शायद
इसलिए बिना ग़लती के मनाने की
रीत नई है..

तुझसे लड़कर मैं बेचैन हो जाता हुँ
फिर मैं किसी मैखाने में कुछ यूँ खो जाता हूँ

जब सामने तु आती है
तो सारा नशा उतर जाता है मेरा

क्या लाज़मी है तेरा मेरी पूरी मैखाने की
शराब को
तेरा सिर्फ़ एक घूँट कर जाना

तु बता
क्या लाज़मी है तेरा रूठ कर जाना..

माना कि कुछ ग़लतियाँ मेरी भी है
कभी मैं बहुत जल्दी करता हूँ
और कभी बहुत देरी भी है

कुछ तेरी मैं सुनना नहीं चाहता
और
कुछ तुझे कहना नहीं चाहता

झगड़ा अपना दमदार है
पर मोहब्बत अपनी गहरी भी है

हर बार लड़ने पर भी
तुझमें एक हिस्सा है मेरा

और उस हिस्से की मौजूदगी
को तेरा सबूत कर जाना

सनम शान्त की
बताना ?

क्या अब भी लाज़मी है तेरा रूठ कर जाना..।


अप्रतिम और अप्रकाशित                                                                   By PRASHANT GURJAR



you can also follow me on -

Instagram - @prashant gurjar
Facebook - #blank voice
Youtube - Prashant gurjar
             (Blank voice)



No comments:

Post a Comment