Saturday, 27 April 2019

अभी कल ही की तो बात है.....।

“अभी कल ही की तो बात है”


अभी कल ही की तो बात है
जैसे कुछ बदला ही नहीं

सुबह हुई फिर से और फिर से अंधेरी रात है
बस अभी कल ही की तो बात है

सब साथ हुआ करते थे
थोड़ी सी मोहब्बत और
कई जिगरी यार हुआ करते थे

आज सिर्फ़ और सिर्फ़ जैसे
जो कल था मेरे पास उसकी मीठी याद है

अभी कल ही की तो बात है

तुम सुनो तो सही

कल वो मेरे साथ थी
आसमां साफ़ था और वो बड़ी हसीन रात थी

उसने नदानी समझा मेरी हर एक बात को
और मैं मज़ाक़ में कहता चला गया
अपने दिल के हर एक जज़्बात को

ना जाने उसने क्या सोचा होगा
अपनी दुनिया में लौटकर

याद करके ख़ुश हुई होगी या
ख़ूब हँसी होगी अपनी साँस रोक कर

क्या उसने मेरे दिल का हाल
ख़ुद को समझाया होगा

या उसने सिर्फ़ मुझे भुलकर
अपने दिल को ओर उलझाया होगा

मुझे पता है मुझे ग़लत समझती है
या यूँ कहूँ की समझती ही नहीं

सब कुछ पता है उसे शायद
या फिर
जानबूझकर वो हर चीज़ से अज्ञात है

जैसे अभी कल ही की बात है

मैं सोचता हूँ की वो क्या सोचती है मेरे बारे में

जब वो जा रही थी तो देखा मैंने
उसकी आँखो में आँसुओं की बरसात है

अभी कल ही की तो बात है

उसे सहारे की ज़रूरत नहीं पता है मुझे
पर मुझे तो उसके साथ चलना है

उसके ग़मों के आगे और उसकी हर ख़ुशी के बाद चलना है
ख़ूबसूरत वो है मगर
दिल उसका ओर सारे मेरे हालात हैं

अब भी महसूस कर सकता हूँ मैं उसे
जैसे बस कल ही की तो बात है

जैसे बस कल ही की तो बात है.....।


अप्रतिम और अप्रकाशित                                                                   By PRASHANT GURJAR



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