Sunday, 7 January 2018

याद तेरी।।।।।



जिस कदर जिस्म तड़पता है
रूह के लिए
उस कदर तड़पा रही हे याद तेरी ।

अकेलेपन का खौफ हे
और आंखों से बारिश करवा रही याद तेरी ।

ये मोहब्बत के रास्ते बड़े मुशकिल है जानेमन
ओर अकेले सफर करवा रही है याद तेरी ।

तुझे अंदाज़ा भी नही होगा जितनी
उतनी आ रही है मुझे याद तेरी ।

मिलकर आया हु तुझसे अभी
मुझे याद है हर एक बात तेरी ।

उन्ही बातों में थोड़ा हँसा भी रही है और 
थोड़ा रुला भी रही है 
याद तेरी ।

मुझसे और सहन नही हो रहे है 
ये फासले ए सनम,

इन में फासलों गुमराह कर रही है 
मुझे याद तेरी ।

वक़्त बे - वक़्त में कुछ सोच नही पाता हूँ
बस तेरे खाबों के भँवर में खो जाता हूँ ।

मन कर रहा है दौड़ कर आऊँ तेरे पास 
फिर कभी ना बिछड़ने के लिए,

में क्या करूँ ए जानेमन 
मुझे ये सब सोचने 
पर मजबूर कर रही है याद तेरी ।

मेरा पल - पल मुद्दतों सा कट रहा है,
                                              मुझे पल - पल सता रही है याद तेरी ।

में जीत जाता हूँ सबसे 
मुझे खुद से हरा रही है याद तेरी

में मरीज़ हुँ तेरा और  
तू दवा है मेरी

मुझे बीमार करके ठीक 
कर रही है याद तेरी

मेरा इस पर काबू नही
बेकाबू बना रही है याद तेरी

अब इंतहा हो रही है तुझे याद करने की और 
मुझे बेइंतहा आ रही है याद तेरी।।।।।




अप्रतिम और अप्रकाशित                                                                    By PRASHANT GURJAR

No comments:

Post a Comment