Thursday, 11 January 2018

ए दिल - ए रुसवाई।



ए मेरे हमराही
ए दिल - ए रुसवाई

तू हमेशा मेरे साथ है
तू दर्द - ए - दिल खास है।।

तू है सर्द हवाओं सा
तू है मस्त फ़िज़ाओं सा

तू है मेरी परछाई

ए मेरे हमराही
ए दिल - ए रुसवाई

तू बहता वक़्त है
तू मुझमे बहता रक्त है

तू है किसी मौसम सा
तू है एक दिया रोशन सा

तेरी पुकार से मेरी सांस आई

ए मेरे हमराही
ए दिल - ए रुसवाई

अगर तू ना होता
तो क्या होता

में गोद मैं किस की
चैन से सोता

तू मंज़िल है मेरी
और में तेरा राही

ए मेरे हमराही
ए दिल - ए रुसवाई

तू है किसी इल्म सा
तू हसीन ज़ुल्म सा

तू हवा है मेरे रुख की
तू दुआ है मेरे हर सुख की

तू नूर खुदा के चेहरे सा
तू मेरे इश्क़ की गवाही

ए मेरे हमराही
ए दिल - ए रुसवाई

तू मेरा अरमान है
तू क़ामिल इंसान है

तू मिला मुझको जो
खुदा मेरा मेहरबान है

तू यंकीनन मेरा है
इसमे कोई शक़ नही

मैं कब्ज़े में हुँ तेरे
ये किसी तरह का वश नहीँ

मैं हैरान हुँ तुझे पाकर भी
भूखा हुँ जैसे सब खाकर भी

तुझे ना देखूँ जिस दिन
तो लगता है मानो

मुझे भगवान ना मिला
मंदिर जाकर भी

तू रहनूमा है मेरा
इस बात को जान ले

तू मुझे भी मेरी तरह
बस एक पल को अपना मान ले

तुझे मेरी चाहत की हद कैसे दिखाऊँ ए सनम

देख अब तो आंखे भी मेरी भर आईं

ए मेरे हमराही
ए दिल - ए रुसवाई

प्यार करले मुझसे कोई एहसान ना कर
हाथ थाम ले मेरा
मेरे इश्क़ को बर्बाद ना कर

मुक्कमल कर मोहब्बत
और प्यार कर मुझसे

मेरे इस जनम को
और ज़ाया ना कर

तेरी आवाज़ जैसे
खुशी में बजती शहनाई

ए मेरे हमराही
ए दिल - ए रुसवाई

मैं समंदर हुँ इश्क़ का
और तु मेरी गहराई

ए मेरे हमराही
ए दिल - ए रुसवाई।।।।।


अप्रतिम और अप्रकाशित                                                                   By PRASHANT GURJAR

Sunday, 7 January 2018

याद तेरी।।।।।



जिस कदर जिस्म तड़पता है
रूह के लिए
उस कदर तड़पा रही हे याद तेरी ।

अकेलेपन का खौफ हे
और आंखों से बारिश करवा रही याद तेरी ।

ये मोहब्बत के रास्ते बड़े मुशकिल है जानेमन
ओर अकेले सफर करवा रही है याद तेरी ।

तुझे अंदाज़ा भी नही होगा जितनी
उतनी आ रही है मुझे याद तेरी ।

मिलकर आया हु तुझसे अभी
मुझे याद है हर एक बात तेरी ।

उन्ही बातों में थोड़ा हँसा भी रही है और 
थोड़ा रुला भी रही है 
याद तेरी ।

मुझसे और सहन नही हो रहे है 
ये फासले ए सनम,

इन में फासलों गुमराह कर रही है 
मुझे याद तेरी ।

वक़्त बे - वक़्त में कुछ सोच नही पाता हूँ
बस तेरे खाबों के भँवर में खो जाता हूँ ।

मन कर रहा है दौड़ कर आऊँ तेरे पास 
फिर कभी ना बिछड़ने के लिए,

में क्या करूँ ए जानेमन 
मुझे ये सब सोचने 
पर मजबूर कर रही है याद तेरी ।

मेरा पल - पल मुद्दतों सा कट रहा है,
                                              मुझे पल - पल सता रही है याद तेरी ।

में जीत जाता हूँ सबसे 
मुझे खुद से हरा रही है याद तेरी

में मरीज़ हुँ तेरा और  
तू दवा है मेरी

मुझे बीमार करके ठीक 
कर रही है याद तेरी

मेरा इस पर काबू नही
बेकाबू बना रही है याद तेरी

अब इंतहा हो रही है तुझे याद करने की और 
मुझे बेइंतहा आ रही है याद तेरी।।।।।




अप्रतिम और अप्रकाशित                                                                    By PRASHANT GURJAR

Sunday, 31 December 2017

बस इसलिए मुझे तुमसे प्यार है.....

बस इसीलिए मुझे तुमसे प्यार है

जब तुम बच्चों 
 की तरह मुझे बुलाती हो

हौले से करीब आती हो
कभी - कभी रूलाती हो

फिर बच्चों की तरह मनाती हो
बस इसलिए तुम पर ऐतबार बार है.....

बस इसलिए मुझे तुमसे प्यार है....


जज़्बात मेरे तुम जानती हो
एक तुम ही तो हो जो दिल से अपना मानती हो.....

माना के बहुत गलतियां करता हु में
पर अच्छा लगता हे जब तुम हक़ से डांटती हो.....

बस इसलिए एक तरफ तू ओर
एक तरफ सारा संसार है.....

बस इसलिए मुझे तुमसे प्यार है.....

अच्छा लगता हे जब तुम मेरी बेतुकी बाते भी
बड़े ध्यान से सुनती हो

अच्छा लगता हे जब तुम कहती हो तुम मेरे हो
अच्छा लगता हे इस दिल को भी जो तुम इसमे रहती हो.....

अच्छा लगता हे जब तुम मेरा गुस्सा भी बड़े प्यार से सहती हो.....

बस इसलिए हर बात तेरी मेरा इकरार है
बस इसलिए मुझे तुमसे प्यार है.....

बस इसलिए सारी दुनिया के सामने ये इकरार है
के बस इसलिए मुझे तुमसे बेइंतहा प्यार है.....

तेरे बिना टिक नही पाऊंगा इस दुनिया मे 
में दो दिन भी

ओर ये दिल भी तेरे बिना लाचार है
बस इसलिए मुझे तुमसे प्यार है.....

तेरे बिना ये जिंदगी बेकार है
बस इसलिए मुझे तुमसे प्यार है.....

बहुत खुश हूं में जो तू मेरे संग ए यार है
बस सिर्फ इसलिए मुझे तुमसे प्यार है.....

मुझे तुमसे ये कहना बहुत अच्छा लगता है
ओर अब यही इस दिल का कारोबार है.....

बस इसलिए मुझे तुमसे प्यार है.....

ए हमदम मेरे हमेशा साथ रहना 
अब तू ही मेरी ज़िंदगी है....


ओर क्यों कि सिर्फ यही मुझे याद है.....

की बस इसलिए मुझे तुमसे प्यार है.....


अप्रतिम और अप्रकाशित                                                By PRASHANT GURJAR

Saturday, 23 December 2017

MUJHE BS MERI MAA CHAHTI HAI.....


mujhe bs meri maa chahti hai
jise mujhe dekh kar sans me sans aati hai

mujhe bs meri maa chahti hai.....

jo mera chehra dekh kar
mere dil ka haal btati hai

fir pyar se mujhe apne paas bulati hai
mujhe bs meri maa chahti hai.....

me haar jata hu kai baar is duniya ki daud me
fir mujhme jitne ki aas jagati hai

mujhe bs meri maa chahti hai.....

jo mujhe dekh kar roti hai
or mujhe dekh kar hi muskurati hai

gamo ko mere ek chutki me bhulati hai
galti ho agar to kabhi - kabhi daant se rulati hai

daantne ke bad fir utne hi pyar se manati hai
or fir apni god me sulati hai

mujhe bs meri maa chahti hai.....

meri besuri zindgi me
har khushi har gam me

mere saaz se raag miltai hai.....

manzil ki raaho me dagmagau agar
to manzil tak pahuchne ka hosla diltai hai

mujhe bs meri maa chahti hai.....

is duniya me sab matlb se pyar krte hai mujhse
bs unhi ka pyar ye dharm ki kitaabe bhi ni-svarth btati hai

mujhe bs meri maa chahti hai.....

mushkilo me shi rasta dikhati hai
lad-khdaun agar to hath thaam leti hai

mujhe bs meri maa chahti hai.....

me soch me pad jata hu aksar
ki ye kyu mere liye itna kuch kar jati hi

fir sar par hath fer kar
me jaan hu uski is baat ka ehsas dilati hai

mujhe bs meri maa chahti hai.....

jisne di hai ye zindgi mujhe
or jo har dua me meri umar badhati hai

mujhe bs meri maa chahti hai.....
mujhe bs meri maa chahti hai.....


अप्रतिम और अप्रकाशित                                                By PRASHANT GURJAR

Saturday, 16 December 2017

SHAYD MERA KAL MERE AAJ SA NA HO.....



shayd mera kal mere aaj sa na ho
shyad mera aj bhi mere kal sa nhi hai.....

sahyad isliye
kyu ki ab meri zindgi me tu nhi hai

ese lgta hai mano
is jism me ab rooh nhi hai.....

ke sahyd meri aarzoo thodi badi thi
ke shyad meri koshisho me hi kuch kami thi

mazil ko paane se kuch hi door tha me bs
or meri aankho me bhi thodi nami thi.....

me jee bhi lu zindgi meri
or mujhe koi malal bhi na ho

shayd mera kal mere aaj sa na ho.....

mere ashk bhi ab nhi behte
mere honth bhi ab kuch nhi kehte

zindgi me jo chahiye wo pana hai jrur
ye zindgi kahi kat na jae

is ummid me rehte rehte.....

dhoka kisi ko du me kese
mera zamir abhi zinda hai

pr me jee raha hu aj bhi
oo ro ke gam sehte sehte.....

shayd ab insano ke khoon ka rang lal sa na ho
ke shayd mera kal mere aaj sa na ho.....

sab chalte rahenge me dodunga ab
raston ko mere me modunga ab

bs kisi ka dil na dukhaun yhi koshish rahegi meri
ye insaniyat me bhi chodunga ab.....

rakhunga me bhi ab dimag me sabko
dil me mere na reh sake ab koi

isliye dil ke aashiyane ko todunga ab.....

kahunga me bhi sabse ki
tum bhut karib ho mere

rishte dimag se me bhi jodunga ab.....

fir shayd mera naam mere kaam sa na ho 
shayd mera kal mere aaj sa na ho.....

fir shayd mera haal bhi bure anjam sa ho
ke shayd fir mera kal mere aaj sa na ho.....


अप्रतिम और अप्रकाशित                                                By PRASHANT GURJAR

Friday, 8 December 2017

VIRAN SA JAHA HAI, VIRAN SA ME HU.....

viran sa jaha hai
viran sa me hu.....

taare kai hai aasman me
grahan ke chand sa me hu.....

kisi ka armaan hu
khuda ka farman hu

kisi ki ek yad
or kisi ke liye bs ek khab hu.....

tu puche kisi se me kaha hu
tu dhundh khud me me waha hu.....

jane ke bad ye zamana bhul jata hai sabko
me ujala tha kisi ka

ab bs ek bujhti hui shama hu.....

behte waqt ki nadi me sabko ek din behna hai
tum jioge hazaro saal ye to sirf ek kehna hai.....

marne ke bad hi jannat nasib hogi mere dost
bs tab tk ke liye is nark ko sehna hai.....

banjar zamin hai meri
or pyase kisan sa me hu

viran sa jaha hai
viran sa me hu.....

kash-m-kash zindgi me chal rhi hai roz

parivaar ko chod kar
jese me ab har kisi pr ek bojh.....

kya insaniyat abhi bhi zinda hai

is sawal pr khtam ho jati hai
n jane kyu meri soch.....

bs isliye gamo ko chod kar me bhi kar rha hu khushi ki khoj....

kyu ki dard jinko mila wo to tadp rahe hai yaha
or dard dene wale kar rhe hai moj.....

aakhir kese ye log ye sab kar pate hai
pyar, mohabbat, rishte, naate ab ye to sirf jhanse hai.....

mere piche hai sab shikari
or bhagte shikar sa me hu

viran sa jaha hai
viran sa me hu.....

marne ke bad jaha apne jalate hai apno ko
us samshan sa me hu.....

viran sa jaha hai viran sa me hu......... 




अप्रतिम और अप्रकाशित                                                By PRASHANT GURJAR

Sunday, 26 November 2017

ZINDAGI AGAR KOI PUCHE.....

zindgi agar koi puche mujhse kesi hoti hai....?



zindgi agar koi puche ki kesi hoti hai
toh likhunga me naam tera.....

agar koi puche kesi dikhti hai
to btaunga use agaam tera

me jee bhi lu jisse
or mar bhi jau jisme
wo ehsas mera.....

zindgi agar ki puche kesi hoti hai
to likhunga me naam tera.....

me reh bhi lu jiske bina
or me reh bhi na pau jiske bina
wo sans jesi hoti hai.....

zindgi na ek dum tere jesi hoti hai
apne ap ko aaiyne me dekh kar

khud se jese baate karu
us kaanch jesi hoti hai.....

meri zuban me zindgi bas tere jesi hoti hai.....

me hasu jisme
me rou jisme

kisi purane gaane jesi hoti hai
meri zuban me zindgi bs tere jesi hoti hai.....


thahar jata hai jab waqt tujhe dekh kar
us lamhe jesi hoti hai

ae jaan kisi or ka to pta nhi
pr meri zindgi hoob - hoo tere jesi hoti hai.....




अप्रतिम और अप्रकाशित                                                By PRASHANT GURJAR

Tuesday, 21 November 2017

ISHQ MERA MEHRBANI USKI....

ishq mera meharbani uski
ye bat me na seh saka zubani uski.....

ek tarfa pyar me uljhta raha me
mushkil meri or aasani uski.....

wajh be wajah har waqt mene
khuda se manga aur waqt mene.....

samjhane ki koshi ki usko bhi
fir akhir me samjhaya khud ko mene.....

saja meri or galti uski
kirdaar mera or khani uski.....

ishq mera or meharbani uski.....

mere jazbaat mere shabdo me nazar aate hai
meri aankho me jo aansu bhi baha laate hai.....

ek pal ko khush ho bhi jaau me
to logo ke khayalaat badal jate hai.....

kismat meri or siyahi uski
ye hawayein bhi diwani uski.....

ke ishq mera mehrbani uski.....

akele jio or mar jao tum
is pyar ke piche na aao tum.....

khuda ne bheja hai tumhe ek maksat dekar
mohbbat me dhokha na khao tum.....

kyu ki khuda mera or bandagi uski
ibaadat meri or dua uski.....

ke ishq mera meharbani uski.....

raah meri or manzil uski
maut meri or zindgani uski.....

ishq mera mehrbani uski.....

अप्रतिम और अप्रकाशित                                                By PRASHANT GURJAR

Friday, 17 November 2017

YE RAAHE MERI HUM DUM HAI.....

ye rahe meri hum dum hai
ye raahe jo mere sang hai.....

pahuchaegi ye mujhe kahi to
chahe ye thodi tang hai.....

inki apni mazil nhi koi
inki raate jo na kabhi soi

roz kuchlti hai pero tale
ye bhi bilkul meri trh roi.....

har raahgir se rishta hai inka
har musafir ki dost hai ye

yaade sabki judi hai inse
fir bhut khamosh hai ye.....

yhi in raho ka dhang hai
ye rahe meri hum dum hai.....

uper, niche, aage, piche
ye raste bade kathin hote hai.....

manzil tak pahuchane ke bad
fir ye utne hi hassen hote hai

pure din chalkar musafir 
rat ko inhi par sote hai.....

in raho se manzil tak ki jung hai
ye rahe meri hum dum hai.....

mijaz inka apnao mere dost
sab kuch seh kar bhi ye chup hai.....

ye raahe jo meri hum dum hai.....


humari duniya jinke bina be-rang hai
ye raahe meri hum dum hai.....

        अप्रतिम और अप्रकाशित                                                By PRASHANT GURJAR

Saturday, 11 November 2017

#blank voice #1 month











ALFAZ JO HAI BADE GEHARE HAI.....

alfaz jo hai bade gahere hai
zuban or dil ke bich jo thehre hai

choo jate hai dil ko ye
kyu ki ye alfaz bhi to mere hai.....

kisi ki ye sirf bate hai
kisi ke liye ye haseen rate hai

kisi ke naram mijaz hai ye
kisi ke jese aag hai ye.....

kisi ki ye bs do pehre hai
alfaz jo hai bade gehare hai.....

alfaz mere ho ya tumhare
bas me nhi ye hamare

hamare khayalo ki den hai ye
kisi ki awaz me dil ka chain hai ye.....

koi inhe samjh nhi pata
or koi inhe bs sochta jata.....

apni trh me ek pehchan
or kisi ke ye chupe chehre hai

alfaz jo hai bade gehare hai.....

kabhi kisi ko das jate hai
kabhi kisi me bas jate hai

takat bhut hai inme janab
ye bhut kam kisi ko raas aate hai.....

kisi ki muh se bs sans hai ye
kisi ke muh se hamari aas hai ye.....

ye to man sagar me behti lehare hai
alfaz jo hai bade gehare hai.....

mithas inme bhut hai
bs samjhne ki der hai

na samjho to ye daant
or samj jao to prem hai.....

me to bs pyar bant raha hu in shabdo se sabko
ap sab ki khushi me
me dhundhta hu rab ko.....

ap sab ko khushi mile asha hai meri
ap sab ka dil jeet sake bhasha ye meri.....

ye jo bhi hai sirf mere hai
alfaz jo hai bade gehare hai.....



अप्रतिम और अप्रकाशित                                               
By PRASHANT GURJAR